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mahabharat 7.160.40-41h: उसने धृष्टद्युम्न की ओर ऐसे देखा मानो उसे अपने नेत्रों के तेज से जला डालेगा। उसी समय सर्प के समान फुंफकारते हुए अश्वत्थामा ने उसे अपने बाणों से ढक लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.160.40-41h 
निर्दहन्निव चक्षुर्भ्यां पार्षतं सोऽभ्यवैक्षत॥ ४०॥
छादयामास च शरैर्नि:श्वसन् पन्नगो यथा।
 
 
अनुवाद
उसने धृष्टद्युम्न की ओर ऐसे देखा मानो उसे अपने नेत्रों के तेज से जला डालेगा। उसी समय सर्प के समान फुंफकारते हुए अश्वत्थामा ने उसे अपने बाणों से ढक लिया।
 
He looked at Dhrishtadyumna as if he would burn him with the brilliance of his eyes. At the same time, hissing like a snake, Ashvatthama covered him with his arrows. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)