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mahabharat 7.160.4: पितामह! हम प्राणों की आसक्ति त्यागकर निर्भय होकर अपनी पूरी शक्ति से युद्ध करते हैं। हे राजनश्रेष्ठ! मैं, कर्ण, शल्य, कृपाचार्य और कृतवर्मा, पाण्डव सेना को पलक झपकते ही नष्ट कर सकते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.160.4 
शक्तितस्तात युध्यामस्त्यक्त्वा प्राणानभीतवत्।
अहं कर्णश्च शल्यश्च कृपो हार्दिक्य एव च।
निमेषात् पाण्डवीं सेनां क्षपयेम नृपोत्तम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पितामह! हम प्राणों की आसक्ति त्यागकर निर्भय होकर अपनी पूरी शक्ति से युद्ध करते हैं। हे राजनश्रेष्ठ! मैं, कर्ण, शल्य, कृपाचार्य और कृतवर्मा, पाण्डव सेना को पलक झपकते ही नष्ट कर सकते हैं।'
 
‘Father! Giving up the attachment to our lives, we fearlessly fight to the best of our abilities. O best of kings! I, Karna, Shalya, Kripa and Kritavarma can destroy the Pandava army in the blink of an eye.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)