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mahabharat 7.160.38-39h: जो ब्राह्मण ब्राह्मणत्व को त्यागकर क्षत्रिय धर्म में लगा हुआ है, वह मनुष्यों में नीच होने के कारण समस्त लोगों के लिए भयकर है।’ 38 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.160.38-39h 
यो हि ब्राह्मण्यमुत्सृज्य क्षत्रधर्मरतो द्विज:॥ ३८॥
स वध्य: सर्वलोकस्य यथा त्वं पुरुषाधम:।
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण ब्राह्मणत्व को त्यागकर क्षत्रिय धर्म में लगा हुआ है, वह मनुष्यों में नीच होने के कारण समस्त लोगों के लिए भयकर है।’ 38 1/2॥
 
The Brahmin who renounces Brahminhood and is engaged in Kshatriya religion, as you are the lowest among humans, is a threat to all people.' 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)