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mahabharat 7.160.35-37h: इसीलिए मैं द्रोण के जीवित रहते हुए युद्धभूमि में तुझे नहीं मार रहा हूँ। हे दुष्ट! आज ही रात्रि में, प्रातःकाल होने से पूर्व, मैं तेरे पिता को मारकर तुझे युद्धभूमि में प्रेतलोक में भेज दूँगा। यह मेरे मन का दृढ़ विचार है।' 35-36 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 35-37h
 
 
श्लोक  7.160.35-37h 
ततस्त्वाहं न हन्म्यद्य द्रोणे जीवति संयुगे॥ ३५॥
इमां तु रजनीं प्राप्तामप्रभातां सुदुर्मते।
निहत्य पितरं तेऽद्य ततस्त्वामपि संयुगे॥ ३६॥
नेष्यामि प्रेतलोकाय ह्येतन्मे मनसि स्थितम्।
 
 
अनुवाद
इसीलिए मैं द्रोण के जीवित रहते हुए युद्धभूमि में तुझे नहीं मार रहा हूँ। हे दुष्ट! आज ही रात्रि में, प्रातःकाल होने से पूर्व, मैं तेरे पिता को मारकर तुझे युद्धभूमि में प्रेतलोक में भेज दूँगा। यह मेरे मन का दृढ़ विचार है।' 35-36 1/2
 
‘That is why I am not killing you on the battlefield while Drona is still alive. O wicked one! This very night, before dawn, I will kill your father and then send you to the ghost world on the battlefield. This is the fixed thought of my mind. 35-36 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)