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mahabharat 7.160.30-31h: उन बाणों से अत्यन्त घायल होकर मणि द्रोणपुत्र पैरों से कुचले हुए सर्प के समान अत्यन्त कुपित हो गया और बिना किसी संशय के हाथ में बाण लेकर इस प्रकार बोला -   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.160.30-31h 
सोऽतिविद्धो भृशं क्रुद्ध: पदाक्रान्त इवोरग:॥ ३०॥
मानी द्रौणिरसम्भ्रान्तो बाणपाणिरभाषत।
 
 
अनुवाद
उन बाणों से अत्यन्त घायल होकर मणि द्रोणपुत्र पैरों से कुचले हुए सर्प के समान अत्यन्त कुपित हो गया और बिना किसी संशय के हाथ में बाण लेकर इस प्रकार बोला -
 
Being severely wounded by those arrows, Mani Drona's son became extremely enraged like a serpent crushed under feet and taking the arrow in his hand without any confusion spoke thus -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)