Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.160.3: हे कुरुश्रेष्ठ! पाण्डव मुझे और मेरे पिता को बहुत प्रिय हैं। उसी प्रकार वे भी हम पिता-पुत्र को बहुत प्रेम करते हैं, किन्तु युद्धभूमि में हम लोगों में यह भावना नहीं होती॥3॥ | mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रिया हि पाण्डवा नित्यं मम चापि पितुश्च मे।
तथैवावां प्रियौ तेषां न तु युद्धे कुरूद्वह॥ ३॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! पाण्डव मुझे और मेरे पिता को बहुत प्रिय हैं। उसी प्रकार वे भी हम पिता-पुत्र को बहुत प्रेम करते हैं, किन्तु युद्धभूमि में हम लोगों में यह भावना नहीं होती॥3॥
O best of the Kurus! The Pandavas are very dear to me and my father. Similarly, he too loves us, father and son, but we do not have this feeling on the battlefield.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥