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mahabharat 7.160.17-18: आपके पुत्र दुर्योधन से ऐसा कहकर महाबाहु अश्वत्थामा समस्त धनुर्धरों को भयभीत करता हुआ युद्ध के लिए शत्रुओं के सामने खड़ा हो गया। प्राणियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा आपके पुत्रों को प्रसन्न करना चाहता था। 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 7.160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 160: अश्वत्थामाका दुर्योधनको उपालम्भपूर्ण आश्वासन देकर पांचालोंके साथ युद्ध करते हुए धृष्टद्युम्नके रथसहित सारथिको नष्ट करके उसकी सेनाको भगाकर अद्भुत पराक्रम दिखाना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  7.160.17-18 
एवमुक्त्वा महाबाहु: पुत्रं दुर्योधनं तव॥ १७॥
अभ्यवर्तत युद्धाय त्रासयन् सर्वधन्विन:।
चिकीर्षुस्तव पुत्राणां प्रियं प्राणभृतां वर:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र दुर्योधन से ऐसा कहकर महाबाहु अश्वत्थामा समस्त धनुर्धरों को भयभीत करता हुआ युद्ध के लिए शत्रुओं के सामने खड़ा हो गया। प्राणियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा आपके पुत्रों को प्रसन्न करना चाहता था। 17-18॥
 
Having said this to your son Duryodhana, the mighty-armed Ashwatthama stood before the enemies for the battle, terrorizing all the archers. Ashwatthama, the best among living beings, wanted to please your sons. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)