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mahabharat 7.16.d8-d9: संजय कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार प्रेरित होकर सारथि अश्वहृदय नामक मन्त्र का जप करता हुआ तथा घोड़ों का हर्ष बढ़ाता हुआ शीघ्रतापूर्वक आच्छादित, उज्ज्वल तथा कान्तियुक्त रथ पर सवार होकर द्रोणाचार्य को आगे ले गया।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक d8-d9
 
 
श्लोक  7.16.d8-d9 
संजय उवाच
एवं संचोदितो यन्ता द्रोणमभ्यवहत् तत:॥
तदाश्वहृदयेनाश्वानभिमन्त्र्याशु हर्षयन्।
रथेन सवरूथेन भास्वरेण विराजता॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार प्रेरित होकर सारथि अश्वहृदय नामक मन्त्र का जप करता हुआ तथा घोड़ों का हर्ष बढ़ाता हुआ शीघ्रतापूर्वक आच्छादित, उज्ज्वल तथा कान्तियुक्त रथ पर सवार होकर द्रोणाचार्य को आगे ले गया।
 
Sanjaya says - O King! Being inspired in this manner, the charioteer, chanting the mantras called Ashwahrdaya and increasing the joy of the horses, quickly took Dronacharya forward in a covered, bright and radiant chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)