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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  7.16.d5 
अर्जुनो मत्प्रसादाद्धि महास्त्राणि समाप्तवान्॥
न मामुत्सहते तात न भीमो न च सात्यकि:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने भी मेरी कृपा से महान् अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए हैं। हे प्रिये! भीमसेन और सात्यकि भी मुझसे युद्ध करने का साहस नहीं कर सकते।
 
Arjun has also obtained great weapons by my grace. O dear! Even Bhimasena and Satyaki cannot dare to fight with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)