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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  7.16.d2 
द्रोण उवाच
सारथे याहि यत्रैव पाण्डरेण विराजता॥
ध्रियमाणेन छत्रेण राजा तिष्ठति धर्मराट्।
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य ने कहा, "सारथी! उस स्थान पर जाओ जहाँ धर्मराज युधिष्ठिर सुन्दर श्वेत छत्र लिए खड़े हैं।"
 
Dronacharya said, "Charioteer! Go to the place where Dharmaraja Yudhishthira is standing holding a beautiful white umbrella."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)