Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.16.9-10: उन्होंने अनायास ही अपने बाणों की वर्षा से कर्णपुत्र वृषसेन को ढककर अदृश्य कर दिया। महाराज! यह देखकर अश्वत्थामा आदि महारथी गर्जना करते हुए उस पर टूट पड़े और जैसे बादल पर्वतों पर जल बरसाते हैं, उसी प्रकार वे नाना प्रकार के बाणों की वर्षा करके द्रौपदी के पुत्रों महारथियों को ढकने लगे॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने अनायास ही अपने बाणों की वर्षा से कर्णपुत्र वृषसेन को ढककर अदृश्य कर दिया। महाराज! यह देखकर अश्वत्थामा आदि महारथी गर्जना करते हुए उस पर टूट पड़े और जैसे बादल पर्वतों पर जल बरसाते हैं, उसी प्रकार वे नाना प्रकार के बाणों की वर्षा करके द्रौपदी के पुत्रों महारथियों को ढकने लगे॥9-10॥
He effortlessly covered Karna's son Vrishasena with a shower of his arrows and made him invisible. Maharaj! Seeing this, great warriors like Ashwatthama attacked him roaring and just like the clouds pour water on the mountains, in the same way they started covering the great warriors, sons of Draupadi, by showering various kinds of arrows.॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥