Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.16.54: जैसे आकाश में चन्द्रमा तारों से युक्त होकर सुशोभित होता है, उसी प्रकार पाण्डु नन्दन अर्जुन इन्द्रजनित, पद्मराग, स्वर्ण, वज्रमणि, मूंगा और स्फटिक आदि बहुमूल्य रत्नों से विभूषित विचित्र रथ पर बैठे हुए शोभायमान हो रहे थे॥54॥ | mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे आकाश में चन्द्रमा तारों से युक्त होकर सुशोभित होता है, उसी प्रकार पाण्डु नन्दन अर्जुन इन्द्रजनित, पद्मराग, स्वर्ण, वज्रमणि, मूंगा और स्फटिक आदि बहुमूल्य रत्नों से विभूषित विचित्र रथ पर बैठे हुए शोभायमान हो रहे थे॥54॥
Just as the moon is adorned in the sky which appears to be speckled with stars, in the same way Pandu Nandan Arjun was looking beautiful sitting in a strange chariot adorned with precious gems like indranjil, padmarag, gold, vajramani, coral and crystal etc. 54॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि प्रथमदिवसावहारे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें द्रोणके प्रथम दिनके युद्धमें सेनाको पीछे लौटानेसे सम्बन्ध रखनेवाला सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १० श्लोक मिलाकर कुल ६४ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥