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mahabharat 7.16.50-51h: तब द्रोणाचार्य और दुर्योधन आदि ने अपनी सेना वापस ले ली। यह जानकर कि शत्रुओं की अब युद्ध में रुचि समाप्त हो गई है और वे अत्यन्त भयभीत हैं, अर्जुन ने भी धीरे-धीरे अपनी सेना को युद्धभूमि से हटा लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.16.50-51h 
ततोऽवहारं चक्रुस्ते द्रोणदुर्योधनादय:।
तान् विदित्वा पुनस्त्रस्तानयुद्धमनस: परान्॥ ५०॥
स्वान्यनीकानि बीभत्सु: शनकैरवहारयत्।
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य और दुर्योधन आदि ने अपनी सेना वापस ले ली। यह जानकर कि शत्रुओं की अब युद्ध में रुचि समाप्त हो गई है और वे अत्यन्त भयभीत हैं, अर्जुन ने भी धीरे-धीरे अपनी सेना को युद्धभूमि से हटा लिया।
 
Then Dronacharya and Duryodhan etc. withdrew their army. Knowing that the enemies have now lost interest in the war and are very scared, Arjuna also slowly withdrew his army from the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)