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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.16.48 
नादृश्यत तदा राजंस्तत्र किंचन संयुगे।
बाणान्धकारे महति कृते गाण्डीवधन्वना॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस युद्धस्थल में गाण्डीवधारी अर्जुन ने अपने बाणों से महान अंधकार फैला दिया था। उसमें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
 
King! In that battle-field, Arjuna, the bearer of Gandiva, had spread great darkness with his arrows. Nothing could be seen in it. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)