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mahabharat 7.16.42: राजन! जब आपके सैनिक ये बातें कह रहे थे, उसी समय महारथी कुन्तीपुत्र अर्जुन बड़े वेग से उनके सामने आये, उनके रथ की घड़घड़ाहट से सारी दिशाएँ गूंज उठीं।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.16.42 
एवं संजल्पतां तेषां तावकानां महारथ:।
आयाज्जवेन कौन्तेयो रथघोषेण नादयन्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राजन! जब आपके सैनिक ये बातें कह रहे थे, उसी समय महारथी कुन्तीपुत्र अर्जुन बड़े वेग से उनके सामने आये, उनके रथ की घड़घड़ाहट से सारी दिशाएँ गूंज उठीं।
 
King! While your soldiers were saying these things, at that very moment the great warrior Arjun, son of Kunti, arrived before them with great speed, the rattling sound of his chariot making all directions resonate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)