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mahabharat 7.16.41: इस शुभ घड़ी में द्रोणाचार्य अवश्य ही युद्धभूमि में राजा युधिष्ठिर को पकड़कर बड़े हर्ष के साथ हमारे राजा दुर्योधन के पास ले आएंगे।'   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.16.41 
अस्मिन् मुहूर्ते द्रोणस्तु पाण्डवं गृह्य हर्षित:।
आगमिष्यति नो नूनं धार्तराष्ट्रस्य संयुगे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस शुभ घड़ी में द्रोणाचार्य अवश्य ही युद्धभूमि में राजा युधिष्ठिर को पकड़कर बड़े हर्ष के साथ हमारे राजा दुर्योधन के पास ले आएंगे।'
 
At this auspicious moment Dronacharya will certainly capture King Yudhishthira on the battlefield and bring him to our King Duryodhana with great joy.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)