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mahabharat 7.16.37: तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोण ने अपने आक्रमण से भल्ल नामक दो बाणों से सिंहसेन और व्याघ्रदत्त के कुंडलित सिरों को धड़ से अलग कर दिया ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.16.37 
ततस्तु सिंहसेनस्य
शिर: कायात् सकुण्डलम्।
व्याघ्रदत्तस्य चाक्रम्य
भल्लाभ्यामाहरद् बली॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोण ने अपने आक्रमण से भल्ल नामक दो बाणों से सिंहसेन और व्याघ्रदत्त के कुंडलित सिरों को धड़ से अलग कर दिया ॥37॥
 
Then, with his attack, the mighty Drona cut off the coiled heads from the bodies of Simhasena and Vyaghradatta with two arrows named Bhalla. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)