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mahabharat 7.16.36: तब द्रोणाचार्य ने आँखें फाड़कर देखकर अपने धनुष की डोरी निकाली और जोर से गर्जना करते हुए राजाओं की सेना पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.16.36 
ततो विस्फार्य नयने धनुर्ज्यामवमृज्य च।
तलशब्दं महत् कृत्वा द्रोणस्तं समुपाद्रवत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य ने आँखें फाड़कर देखकर अपने धनुष की डोरी निकाली और जोर से गर्जना करते हुए राजाओं की सेना पर आक्रमण कर दिया।
 
Then Dronacharya, looking with wide open eyes, cleaned the string of his bow and making a loud roar attacked the army of kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)