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mahabharat 7.16.35: सिंहसेन ने हर्ष से भरकर तुरन्त ही महाबली द्रोणाचार्य को घायल कर दिया और अचानक जोर से हंसने लगा, जिससे अन्य महाबली योद्धाओं के हृदय में भय उत्पन्न हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.16.35 
त्वरितं सिंहसेनस्तु द्रोणं विद्‍ध्वा महारथम्।
प्राहसत् सहसा हृष्टस्त्रासयन् वै महारथान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सिंहसेन ने हर्ष से भरकर तुरन्त ही महाबली द्रोणाचार्य को घायल कर दिया और अचानक जोर से हंसने लगा, जिससे अन्य महाबली योद्धाओं के हृदय में भय उत्पन्न हो गया।
 
Singhasena, filled with joy, instantly wounded the mighty warrior Dronacharya and suddenly laughed loudly, creating fear in the hearts of the other mighty warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)