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mahabharat 7.16.34: महाराज! पांचालदेशी बाघ दत्त ने पचास तीखे बाणों से द्रोणाचार्य को घायल कर दिया। तब सब लोग जोर-जोर से जयजयकार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.16.34 
व्याघ्रदत्तस्तु पाञ्चाल्यो द्रोणं विव्याध मार्गणै:।
पञ्चाशता शितै राजंस्तत उच्चुक्रुशुर्जना:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! पांचालदेशी बाघ दत्त ने पचास तीखे बाणों से द्रोणाचार्य को घायल कर दिया। तब सब लोग जोर-जोर से जयजयकार करने लगे।
 
King! The Panchaldeshi tiger Datta injured Dronacharya with fifty sharp arrows. Then everyone started shouting loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)