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mahabharat 7.16.30: उस समय राजा युगंधर ने समुद्र के समान क्रोध से भरे हुए तथा वायु के झोंकों से व्याकुल हो रहे महारथी द्रोणाचार्य को रोक लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.16.30 
युगन्धरस्ततो राजन् भारद्वाजं महारथम्।
वारयामास संक्रुद्धं वातोद्धतमिवार्णवम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा युगंधर ने समुद्र के समान क्रोध से भरे हुए तथा वायु के झोंकों से व्याकुल हो रहे महारथी द्रोणाचार्य को रोक लिया।
 
At that time, King Yugandhar stopped the great warrior Dronacharya who was filled with anger like the ocean and was agitated by the gusts of wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)