Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.16.3: महाराज! जैसे ग्रीष्म ऋतु में सूर्य से हजारों किरणें निकलकर सब दिशाओं में फैल जाती हैं, उसी प्रकार वृषसेन के धनुष से हजारों तेजस्वी बाण निकलने लगे। | mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य दीप्ता महाबाणा विनिश्चेरु: सहस्रश:।
भानोरिव महाराज धर्मकाले मरीचय:॥ ३॥
अनुवाद
महाराज! जैसे ग्रीष्म ऋतु में सूर्य से हजारों किरणें निकलकर सब दिशाओं में फैल जाती हैं, उसी प्रकार वृषसेन के धनुष से हजारों तेजस्वी बाण निकलने लगे।
Maharaj! Just as thousands of rays emerge from the Sun in the summer season and spread in all directions, in the same way thousands of brilliant arrows began to emerge from Vrishasena's bow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥