Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.16.27-28: उसने शिखण्डी को बारह बाणों से, उत्तमौजा को बीस बाणों से, नकुल को पाँच बाणों से और सहदेव को सात बाणों से घायल कर दिया; तत्पश्चात् उसने युधिष्ठिर को बारह बाणों से, द्रौपदी के पाँचों पुत्रों को तीन-तीन बाणों से, सात्यकि को पाँच बाणों से और विराट को दस बाणों से घायल कर दिया॥27-28॥ | mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शिखण्डिनं द्वादशभिर्विंशत्या चोत्तमौजसम्।
नकुलं पञ्चभिर्विद्ध्वा सहदेवं च सप्तभि:॥ २७॥
युधिष्ठिरं द्वादशभिर्द्रौपदेयांस्त्रिभिस्त्रिभि:।
सात्यकिं पञ्चभिर्विद्ध्वा मत्स्यं च दशभि: शरै:॥ २८॥
अनुवाद
उसने शिखण्डी को बारह बाणों से, उत्तमौजा को बीस बाणों से, नकुल को पाँच बाणों से और सहदेव को सात बाणों से घायल कर दिया; तत्पश्चात् उसने युधिष्ठिर को बारह बाणों से, द्रौपदी के पाँचों पुत्रों को तीन-तीन बाणों से, सात्यकि को पाँच बाणों से और विराट को दस बाणों से घायल कर दिया॥27-28॥
He wounded Shikhandi with twelve arrows, Uttamauja with twenty, Nakula with five and Sahadeva with seven arrows, and after that he pierced Yudhishthira with twelve arrows, Draupadi's five sons with three each, Satyaki with five arrows and Virat with ten arrows.॥27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥