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mahabharat 7.16.26: राजन! भारद्वाजनंदन विप्रवर द्रोणाचार्य आपकी सेना के रक्षक थे। वे पाण्डव सेना के मध्य में घुसकर सब दिशाओं में विचरण करने लगे॥26॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.16.26 
स मध्यं प्राप्य सैन्यानां सर्वा: प्रविचरन् दिश:।
तव सैन्यस्य गोप्ताऽऽसीद् भारद्वाजो द्विजर्षभ:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजन! भारद्वाजनंदन विप्रवर द्रोणाचार्य आपकी सेना के रक्षक थे। वे पाण्डव सेना के मध्य में घुसकर सब दिशाओं में विचरण करने लगे॥26॥
 
Rajan! Bhardwajnandan Vipravar Dronacharya was the protector of your army. They entered the midst of the Pandava army and started wandering in all directions. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)