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mahabharat 7.16.21: उस समय युधिष्ठिर के रथ के पहिये की रक्षा करने वाले कुमार (जो पांचालों की कीर्ति बढ़ाने वाले हैं) ने आते हुए द्रोणाचार्य को उसी प्रकार रोक दिया, जैसे किनारा समुद्र को रोक देता है।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.16.21 
चक्ररक्ष: कुमारस्तु पञ्चालानां यशस्कर:।
दधार द्रोणमायान्तं वेलेव सरितां पतिम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय युधिष्ठिर के रथ के पहिये की रक्षा करने वाले कुमार (जो पांचालों की कीर्ति बढ़ाने वाले हैं) ने आते हुए द्रोणाचार्य को उसी प्रकार रोक दिया, जैसे किनारा समुद्र को रोक देता है।
 
At that time the Kumara (the one who enhances the glory of the Panchalas) who was protecting the wheel of Yudhishthira's chariot, stopped the oncoming Dronacharya just as the shore stops the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)