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mahabharat 7.16.2: उस युद्धभूमि में वृषसेन के छोड़े हुए बाण हाथियों, घोड़ों, रथों और मनुष्यों को छेदते हुए सभी दिशाओं में फैल गए।   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.16.2 
शरा दश दिशो मुक्ता वृषसेनेन संयुगे।
विचेरुस्ते विनिर्भिद्य नरवाजिरथद्विपान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धभूमि में वृषसेन के छोड़े हुए बाण हाथियों, घोड़ों, रथों और मनुष्यों को छेदते हुए सभी दिशाओं में फैल गए।
 
On that battlefield, the arrows shot by Vrishasena pierced elephants, horses, chariots and men and travelled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)