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mahabharat 7.16.18: शत्रुओं द्वारा बुरी तरह कुचली हुई आपकी सेना को भागते हुए देखकर द्रोणाचार्य ने कहा, "वीर योद्धाओं! भागो मत, इससे कोई लाभ नहीं होगा।" ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.16.18 
तत् प्रभग्नं बलं दृष्ट्वा शत्रुभिर्भृशमर्दितम्।
अलं द्रुतेन व: शूरा इति द्रोणोऽभ्यभाषत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं द्वारा बुरी तरह कुचली हुई आपकी सेना को भागते हुए देखकर द्रोणाचार्य ने कहा, "वीर योद्धाओं! भागो मत, इससे कोई लाभ नहीं होगा।" ॥18॥
 
Seeing your army fleeing after being thoroughly crushed by the enemies, Dronacharya said, "Valiant warriors! Do not flee, it will be of no use." ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)