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mahabharat 7.16.14: क्रोध में युद्ध करते हुए उन महाप्रतापी राजाओं के शरीर युद्ध की इच्छा से आकाश में इकट्ठे हुए पक्षीराज गरुड़ और सर्पों के समान प्रतीत हो रहे थे ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.16.14 
तेषां ददृशिरे कोपाद् वपूंष्यमिततेजसाम्।
युयुत्सूनामिवाकाशे पतत्त्रिवरभोगिनाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में युद्ध करते हुए उन महाप्रतापी राजाओं के शरीर युद्ध की इच्छा से आकाश में इकट्ठे हुए पक्षीराज गरुड़ और सर्पों के समान प्रतीत हो रहे थे ॥14॥
 
The bodies of those illustrious kings, fighting in anger, appeared like the king of birds, Garuda, and serpents, gathered in the sky with the desire for war. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)