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mahabharat 7.16.1: संजय कहते हैं - महाराज! आपकी विशाल सेना को तितर-बितर होते देख, एकमात्र वीर वृषसेन ने अपने अस्त्रों के जादू से उसे युद्धस्थल में रोक लिया (उसे भागने से रोक दिया)॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.16.1 
संजय उवाच
तद् बलं सुमहद् दीर्णं त्वदीयं प्रेक्ष्य वीर्यवान्।
दधारैको रणे राजन् वृषसेनोऽस्त्रमायया॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! आपकी विशाल सेना को तितर-बितर होते देख, एकमात्र वीर वृषसेन ने अपने अस्त्रों के जादू से उसे युद्धस्थल में रोक लिया (उसे भागने से रोक दिया)॥1॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Seeing your huge army scattered, the only valiant Vrishasena held it in the battle-field (prevented it from fleeing) with the magic of his weapons.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)