Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.159.99: महाबाहो! जाओ, जाओ। हमारे कार्य में विलम्ब नहीं होना चाहिए। देखो, यह सेना अर्जुन के बाणों से पीड़ित होकर भाग रही है।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  7.159.99 
गच्छ गच्छ महाबाहो न न: कालात्ययो भवेत्।
इयं हि द्रवते सेना पार्थसायकपीडिता॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! जाओ, जाओ। हमारे कार्य में विलम्ब नहीं होना चाहिए। देखो, यह सेना अर्जुन के बाणों से पीड़ित होकर भाग रही है।
 
Mahabaho! Go, go. There should be no delay in our task. Look, this army is running away, afflicted by Arjun's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)