श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  7.159.94 
अश्वत्थामंस्त्वरायुक्तो याहि शीघ्रमरिंदम।
आदौ वा यदि वा पश्चात् तवेदं कर्म मारिष॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले माननीय भाई अश्वत्थामा! आप शीघ्र चलें। चाहे पहले करें या बाद में, यह कार्य आपके हाथ में है ॥ 94॥
 
O honourable brother Ashvatthama, the destroyer of enemies, you should go quickly. Whether you do it first or later, this task is in your hands. ॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)