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mahabharat 7.159.92-93: हे ब्राह्मण! वे प्रसिद्ध पांचाल और सोमक क्रोध में भरकर मेरी सेना में दावानल के समान विचरण कर रहे हैं। केकय भी उनके साथ हैं। हे महाबाहु! हे पुरुषश्रेष्ठ! वे किरीटधारी अर्जुन द्वारा सुरक्षित मेरी सेना का समूल नाश कर सकते हैं। अतः उन्हें पहले ही रोक लो।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 92-93
 
 
श्लोक  7.159.92-93 
एते हि सोमका विप्र पञ्चालाश्च यशस्विन:।
मम सैन्येषु संक्रुद्धा विचरन्ति दवाग्निवत्॥ ९२॥
तान् वारय महाबाहो केकयांश्च नरोत्तम।
पुरा कुर्वन्ति नि:शेषं रक्ष्यमाणा: किरीटिना॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! वे प्रसिद्ध पांचाल और सोमक क्रोध में भरकर मेरी सेना में दावानल के समान विचरण कर रहे हैं। केकय भी उनके साथ हैं। हे महाबाहु! हे पुरुषश्रेष्ठ! वे किरीटधारी अर्जुन द्वारा सुरक्षित मेरी सेना का समूल नाश कर सकते हैं। अतः उन्हें पहले ही रोक लो।
 
O Brahmin! Those famous Panchalas and Somakas, filled with anger, are roaming in my army like a forest fire. Kekayas are also with them. O mighty-armed one! O best of men! They may destroy my army completely, protected by the crown-wearing Arjuna. So stop them beforehand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)