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mahabharat 7.159.90: अश्वत्थामा! प्रसन्न हो जाओ। मेरे इन शत्रुओं का नाश करो। देवता और दानव भी तुम्हारे अस्त्रों के सामने टिक नहीं सकते। ॥90॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  7.159.90 
अश्वत्थामन् प्रसीदस्व नाशयैतान् ममाहितान्।
तवास्त्रगोचरे शक्ता: स्थातुं देवा न दानवा:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा! प्रसन्न हो जाओ। मेरे इन शत्रुओं का नाश करो। देवता और दानव भी तुम्हारे अस्त्रों के सामने टिक नहीं सकते। ॥90॥
 
Ashvatthaman! Be pleased. Destroy these enemies of mine. Even gods and demons cannot stand in the way of your weapons. ॥90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)