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mahabharat 7.159.83: अपने चाचा की यह बात सुनकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त ही दुर्योधन के पास गया और इस प्रकार बोला ॥ 83॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  7.159.83 
मातुलेनैवमुक्तस्तु द्रौणि: शस्त्रभृतां वर:।
दुर्योधनमिदं वाक्यं त्वरित: समभाषत॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
अपने चाचा की यह बात सुनकर शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त ही दुर्योधन के पास गया और इस प्रकार बोला ॥ 83॥
 
On hearing his uncle say this, Ashwathama, the son of Drona, the best among weapon bearers, immediately went to Duryodhana and said thus:॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)