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mahabharat 7.159.82: जैसे सिंह के साथ युद्ध करने पर हाथी का जीवित रहना असम्भव है, वैसे ही मैं कुरुवंशी दुर्योधन का भी, किरीटधारी कुन्तीपुत्र अर्जुन के साथ युद्ध करने पर जीवित रहना अत्यन्त कठिन समझता हूँ ॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  7.159.82 
दुर्लभं जीवितं मन्ये कौरव्यस्य किरीटिना।
युध्यमानस्य पार्थेन शार्दूलेनेव हस्तिन:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जैसे सिंह के साथ युद्ध करने पर हाथी का जीवित रहना असम्भव है, वैसे ही मैं कुरुवंशी दुर्योधन का भी, किरीटधारी कुन्तीपुत्र अर्जुन के साथ युद्ध करने पर जीवित रहना अत्यन्त कठिन समझता हूँ ॥ 82॥
 
Just as it is impossible for an elephant to survive when it fights with a lion, similarly I consider it very difficult for Duryodhana of the Kuru dynasty to survive when he engages in a war with the crown-wearing Arjuna, the son of Kunti.' ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)