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mahabharat 7.159.81: माननीय! मुझे यह अनुचित प्रतीत होता है कि हमारे रहते हुए राजा दुर्योधन स्वयं बिना किसी सहायक के अर्जुन से युद्ध करने चले।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  7.159.81 
अयुक्तमिव पश्यामि तिष्ठत्स्वस्मासु मानद।
स्वयं युद्धाय यद् राजा पार्थं यात्यसहायवान्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
माननीय! मुझे यह अनुचित प्रतीत होता है कि हमारे रहते हुए राजा दुर्योधन स्वयं बिना किसी सहायक के अर्जुन से युद्ध करने चले।
 
Honorable! It seems improper to me that in our presence, King Duryodhana himself should go to war with Arjuna without any helper. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)