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mahabharat 7.159.80: जब तक राजा दुर्योधन अर्जुन के भयंकर बाणों से भस्म नहीं हो जाता, तब तक वे उसे युद्ध करने से नहीं रोकते, जैसे सर्प अपनी केंचुली से मुक्त हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  7.159.80 
यावत् पार्थशरैर्घोरैर्निर्मुक्तोरगसंनिभै:।
न भस्मीक्रियते राजा तावद् युद्धान्निवार्यताम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जब तक राजा दुर्योधन अर्जुन के भयंकर बाणों से भस्म नहीं हो जाता, तब तक वे उसे युद्ध करने से नहीं रोकते, जैसे सर्प अपनी केंचुली से मुक्त हो जाते हैं।
 
Until King Duryodhana is reduced to ashes by Arjuna's fierce arrows, like serpents breaking free from their sloughing skin, stop him from fighting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)