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mahabharat 7.159.7-8: मूर्खता! हे राजा! इन राजाओं सहित तुममें ऐसी कौन सी शक्ति है कि तुम संसार के एकमात्र अपराजित वीर अर्जुन को जीत सको, जो समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ है और जिसे इन्द्र सहित समस्त देवता और दानव भी श्रीकृष्ण के साथ रहते हुए जीतने में समर्थ नहीं हैं?   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  7.159.7-8 
यं हि कृष्णेन सहितं सर्वशस्त्रभृतां वरम्।
जेतुं न शक्ता: सहिता: सेन्द्रा अपि सुरासुरा:॥ ७॥
लोकैकवीरमजितमर्जुनं सूत संयुगे।
किं पुनस्त्वं सुदुर्बुद्धे सहैभिर्वसुधाधिपै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मूर्खता! हे राजा! इन राजाओं सहित तुममें ऐसी कौन सी शक्ति है कि तुम संसार के एकमात्र अपराजित वीर अर्जुन को जीत सको, जो समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ है और जिसे इन्द्र सहित समस्त देवता और दानव भी श्रीकृष्ण के साथ रहते हुए जीतने में समर्थ नहीं हैं?
 
Idiocy! Yarn! What power do you, along with these kings, have to conquer Arjuna, the only undefeated hero of the world, who is the best among all wielders of weapons and whom even all the gods and demons, including Indra, are not capable of conquering when he is with Shri Krishna? 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)