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mahabharat 7.159.64-65h: बाणों से घायल कर्ण अपने घोड़े मारे हुए रथ से उतरकर तुरन्त कृपाचार्य के रथ पर चढ़ गया।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  7.159.64-65h 
हताश्वात् तु रथात् तूर्णमवप्लुत्य नरर्षभ:॥ ६४॥
आरुरोह रथं तूर्णं कृपस्य शरपीडित:।
 
 
अनुवाद
बाणों से घायल कर्ण अपने घोड़े मारे हुए रथ से उतरकर तुरन्त कृपाचार्य के रथ पर चढ़ गया।
 
Immediately alighting from the chariot whose horses had been killed, Karna, wounded by arrows, quickly boarded the chariot of Krupacharya. 64 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)