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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  7.159.62-63h 
अश्वांश्च चतुरो भल्लैरनयद् यमसादनम्॥ ६२॥
सारथेश्च शिर: कायादहरच्छत्रुतापन:।
 
 
अनुवाद
साथ ही, चार बाणों से उसके चारों घोड़ों को यमलोक भेज दिया। तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने उसके सारथि का सिर धड़ से अलग कर दिया।
 
Also, his four horses were sent to Yamaloka with four arrows. Then Arjuna, the tormentor of enemies, severed the head of his charioteer from his body. 62 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)