Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.159.6: सुताधाम! तुम केवल अपनी इच्छा से ही उन लोगों को पराजित करने की व्यर्थ इच्छा कर रहे हो, जिन्होंने युद्धस्थल में परमेश्वर के साथ युद्ध किया है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.159.6 
येन साक्षान्महादेवो योधित: समरे पुरा।
तमिच्छसि वृथा जेतुं सूताधम मनोरथै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सुताधाम! तुम केवल अपनी इच्छा से ही उन लोगों को पराजित करने की व्यर्थ इच्छा कर रहे हो, जिन्होंने युद्धस्थल में परमेश्वर के साथ युद्ध किया है॥6॥
 
Sutaadham! You are vainly wishing to defeat those who have fought with the Supreme Lord in the battlefield merely by your wishes. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)