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mahabharat 7.159.56: इसके अतिरिक्त क्रोधित, पराक्रमी एवं शक्तिशाली अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कर्ण की बायीं भुजा के अग्रभाग पर 'नाराच' नामक बाण से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.159.56 
विव्याध चैनं संरब्धो बाणेनैकेन वीर्यवान्।
सव्ये भुजाग्रे बलवान् नाराचेन हसन्निव॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त क्रोधित, पराक्रमी एवं शक्तिशाली अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कर्ण की बायीं भुजा के अग्रभाग पर 'नाराच' नामक बाण से प्रहार किया।
 
Besides this, the enraged, valiant and powerful Arjuna smilingly struck Karna's left arm on the front with an arrow called 'Naracha'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)