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mahabharat 7.159.51-52h: संजय बोले, 'हे राजन! जैसे एक हाथी दूसरे हाथी को आते देखकर उसका सामना करने के लिए आगे बढ़ता है, वैसे ही जब कर्ण पाण्डवपुत्र धनंजय को आते देखता है, तो वह युद्ध में बिना किसी घबराहट के उसका सामना करने के लिए आगे बढ़ता है।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.159.51-52h 
संजय उवाच
आयान्तं पाण्डवं दृष्ट्वा गजं प्रतिगजो यथा॥ ५१॥
असम्भ्रान्तो रणे कर्ण: प्रत्युदीयाद् धनंजयम्।
 
 
अनुवाद
संजय बोले, 'हे राजन! जैसे एक हाथी दूसरे हाथी को आते देखकर उसका सामना करने के लिए आगे बढ़ता है, वैसे ही जब कर्ण पाण्डवपुत्र धनंजय को आते देखता है, तो वह युद्ध में बिना किसी घबराहट के उसका सामना करने के लिए आगे बढ़ता है।
 
Sanjaya said, 'O King! Just as when one elephant sees another elephant coming, it moves forward to face him, similarly when Karna sees Dhananjaya, the son of Pandava, coming, he moves forward to face him in the battle without any nervousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)