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mahabharat 7.159.5: जब गाण्डीवधारी अर्जुन ने युद्धभूमि में तुम्हें परास्त किया और तुम्हारे सामने जयद्रथ का वध किया, उस समय तुम्हारा पराक्रम कहाँ था? तुम्हारे अस्त्र-शस्त्र कहाँ चले गए?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.159.5 
क्व ते वीर्यं क्व चास्त्राणि यत्त्वां निर्जित्य संयुगे।
गाण्डीवधन्वा हतवान् प्रेक्षतस्ते जयद्रथम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब गाण्डीवधारी अर्जुन ने युद्धभूमि में तुम्हें परास्त किया और तुम्हारे सामने जयद्रथ का वध किया, उस समय तुम्हारा पराक्रम कहाँ था? तुम्हारे अस्त्र-शस्त्र कहाँ चले गए?॥5॥
 
When Arjuna, the bearer of Gandiva, defeated you on the battlefield and killed Jayadratha in front of you, where was your valour at that time? Where did your weapons go?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)