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mahabharat 7.159.37-38h: तत्पश्चात् कर्ण के बाणों से पीड़ित और व्याकुल हुए वे राजा शीत से पीड़ित गायों के समान इधर-उधर भटकने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.159.37-38h 
ततस्ते व्याकुलीभूता राजान: कर्णपीडिता:॥ ३७॥
बभ्रमुस्तत्र तत्रैव गाव: शीतार्दिता इव।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कर्ण के बाणों से पीड़ित और व्याकुल हुए वे राजा शीत से पीड़ित गायों के समान इधर-उधर भटकने लगे।
 
Thereafter, the kings, afflicted and troubled by Karna's arrows, began to wander about like cows suffering from cold. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)