Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.159.3-4: अश्वत्थामा ने कहा - मूर्ख! नीच! मेरे चाचा सम्पूर्ण जगत में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर और वीर योद्धा हैं। वे अर्जुन के वास्तविक गुणों का वर्णन कर रहे थे, फिर भी तू द्वेषवश अपनी वीरता का बखान कर रहा है और आज युद्ध में अपने अहंकार में चूर होकर उसे फटकार रहा है तथा किसी को कुछ भी नहीं समझ रहा है। इसका क्या कारण है?॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्वत्थामा ने कहा - मूर्ख! नीच! मेरे चाचा सम्पूर्ण जगत में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर और वीर योद्धा हैं। वे अर्जुन के वास्तविक गुणों का वर्णन कर रहे थे, फिर भी तू द्वेषवश अपनी वीरता का बखान कर रहा है और आज युद्ध में अपने अहंकार में चूर होकर उसे फटकार रहा है तथा किसी को कुछ भी नहीं समझ रहा है। इसका क्या कारण है?॥3-4॥
Ashvatthama said - Foolish one! Wretched one! My uncle is the best archer and brave warrior in the entire world. He was describing the true qualities of Arjun, yet you are boasting about your bravery out of enmity and are reprimanding him in the war today in your pride and not considering anyone as anything. What is the reason for that?॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥