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mahabharat 7.159.20-21h: देवताओं से घिरे हुए तथा इंद्र जैसे श्रेष्ठ कौरव योद्धाओं से घिरे हुए कर्ण ने अपनी शारीरिक शक्ति पर भरोसा रखते हुए अपना धनुष उठाया और युद्ध के लिए खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.159.20-21h 
कर्णोऽपि रथिनां श्रेष्ठश्चापमुद्यम्य वीर्यवान्।
कौरवाग्रॺै: परिवृत: शक्रो देवगणैरिव॥ २०॥
पर्यतिष्ठत तेजस्वी स्वबाहुबलमाश्रित:।
 
 
अनुवाद
देवताओं से घिरे हुए तथा इंद्र जैसे श्रेष्ठ कौरव योद्धाओं से घिरे हुए कर्ण ने अपनी शारीरिक शक्ति पर भरोसा रखते हुए अपना धनुष उठाया और युद्ध के लिए खड़ा हो गया।
 
Surrounded by the gods and surrounded by the foremost Kaurava warriors like Indra, Karna, trusting in his physical strength, took up his bow and stood for the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)