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mahabharat 7.159.19: संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् महाबली पाण्डव और पांचाल सेनाएँ मिलकर गर्जना और जयजयकार करते हुए सब ओर से कर्ण पर टूट पड़ीं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.159.19 
संजय उवाच
ततस्ते पाण्डवा राजन् पञ्चालाश्च यशस्विन:।
आजग्मु: सहिता: कर्णं तर्जयन्त: समन्तत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् महाबली पाण्डव और पांचाल सेनाएँ मिलकर गर्जना और जयजयकार करते हुए सब ओर से कर्ण पर टूट पड़ीं॥19॥
 
Sanjaya says - O King! Thereafter the illustrious Pandavas and the Panchalas together roaring and shouting attacked Karna from all sides.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)