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mahabharat 7.159.18: कृपाचार्य बोले, "हे मूर्ख सारथीपुत्र! हम तुम्हारे इस अपराध को क्षमा करते हैं, किन्तु अर्जुन अवश्य ही तुम्हारे इस अत्यधिक अभिमान का नाश करेगा।"   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.159.18 
कृप उवाच
तवैतत् क्षम्यतेऽस्माभि: सूतात्मज सुदुर्मते।
दर्पमुत्सिक्तमेतत् ते फाल्गुनो नाशयिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य बोले, "हे मूर्ख सारथीपुत्र! हम तुम्हारे इस अपराध को क्षमा करते हैं, किन्तु अर्जुन अवश्य ही तुम्हारे इस अत्यधिक अभिमान का नाश करेगा।"
 
Krupacharya said, "You foolish son of a charioteer! We forgive you for this crime, but Arjuna will surely put an end to your excessive pride." 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)