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mahabharat 7.159.15: ब्रह्मन्! समस्त पाण्डव सैनिक राधापुत्र कर्ण से युद्ध करने की इच्छा से उसे चारों ओर से ललकार रहे हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.159.15 
एते ह्यभिमुखा: सर्वे राधेयेन युयुत्सव:।
आयान्ति पाण्डवा ब्रह्मन्नाह्वयन्त: समन्तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! समस्त पाण्डव सैनिक राधापुत्र कर्ण से युद्ध करने की इच्छा से उसे चारों ओर से ललकार रहे हैं॥15॥
 
Brahman! All the Pandava soldiers have been challenging him from all sides, desiring a war with Radha's son Karna. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)